Wednesday, 30 April 2025

भारत से पाकिस्तानियों का निष्कासन: वर्षों से बसे परिवारों के लिए क्या यह न्यायसंगत है?

भारत में कई ऐसे पाकिस्तानी नागरिक हैं जिन्होंने वर्षों पहले भारतीय जीवनसाथी से विवाह किया और अब उनका पूरा परिवार यहीं बस चुका है। बच्चे यहीं पैदा हुए, यहीं पले-बढ़े। पर अब, एक आतंकी हमले के बाद, उन्हें "विदेशी" कहकर देश छोड़ने का आदेश दिया जा रहा है।

सुरक्षा ज़रूरी है, पर क्या मानवता और रिश्तों को अनदेखा करना सही है?
क्या वो जो भारत की बहू-बेटी या दामाद बन चुके हैं, अब अचानक पराए हो गए?

भारत से पाकिस्तानियों का निष्कासन: वर्षों से बसे परिवारों के लिए क्या यह न्यायसंगत है?


हाल ही में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने देश में रह रहे कुछ पाकिस्तानी नागरिकों को निष्कासित करने की प्रक्रिया तेज़ कर दी है। यह फैसला सुरक्षा के दृष्टिकोण से लिया गया है, लेकिन इसके दायरे में ऐसे लोग भी आ गए हैं जो न केवल वर्षों से भारत में रह रहे हैं, बल्कि जिनकी पूरी ज़िंदगी अब इसी देश से जुड़ चुकी है।

वो जिन्होंने यहीं जीवन बसाया

कई ऐसे पाकिस्तानी मूल के लोग हैं, विशेष रूप से महिलाएं, जिनकी शादियाँ भारतीय नागरिकों से हुईं और जो दशकों से भारत में रह रही हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति को अपनाया, अपने परिवारों का पालन-पोषण यहीं किया, और अब उनकी जड़ें इसी मिट्टी में हैं। इन परिवारों के लिए अचानक यह कहना कि वे "विदेशी" हैं और उन्हें देश छोड़ना होगा, एक गहरी मानवीय पीड़ा और असमंजस पैदा करता है।

कानून बनाम मानवता

यह सत्य है कि भारत की सुरक्षा सर्वोच्च है और किसी भी विदेशी नागरिक की उपस्थिति कानूनी रूप से नियंत्रित होनी चाहिए। लेकिन जब कोई व्यक्ति एक भारतीय नागरिक से विवाह कर, वर्षों से भारत में जीवन बिता चुका हो, तब क्या उसे केवल कागज़ी नागरिकता के आधार पर देश से बाहर निकाल देना उचित है?

बच्चों का संकट

इन परिवारों में अक्सर बच्चे होते हैं जो भारत में जन्मे, यहीं पले-बढ़े और अब यहीं की पहचान के साथ बड़े हो रहे हैं। उनके लिए उनकी मां या पिता का निष्कासन केवल एक कानूनी कार्यवाही नहीं, बल्कि उनके पूरे पारिवारिक जीवन को तोड़ने जैसा है। क्या बच्चों के अधिकारों और भावनाओं का भी कोई मूल्य नहीं?

सरकारी नीति में लचीलापन ज़रूरी

सामूहिक निष्कासन की नीति से उन लोगों को भी परेशानी हो रही है जो किसी भी तरह से देश की सुरक्षा के लिए खतरा नहीं हैं। ऐसे मामलों की व्यक्तिगत समीक्षा होनी चाहिए। खासकर वे मामले जहाँ विवाह, परिवार, और सामाजिक समर्पण की गहराई है, वहाँ मानवीय दृष्टिकोण अपनाना ही उचित होगा।

निष्कर्ष

भारत हमेशा से विविधता और सहिष्णुता का प्रतीक रहा है। ऐसे में उन पाकिस्तानी नागरिकों के प्रति जो भारत में शादी करके बस गए हैं, न्यायपूर्ण और मानवीय रवैया अपनाना देश की गरिमा को और ऊँचा करेगा। सुरक्षा ज़रूरी है, परंतु संवेदनशीलता और विवेक भी उतने ही आवश्यक हैं।




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